कोरोना वायरस
छिड गई कैसी ये बहस यार
वायरस है ये या जैविक हथियार
जीने की आस में भागते लोग
मौतों का लग गया है अम्बार
बेबस हो गई है दुनिया सारी
सुने पड़े मंदिर सुने पड़े मजार
खाने कमाने के लाले पड़ गए
रोटी में ही खर्च हो गयी पगार
रोज की ताजा कमाई वाले बेबस
आ गए सड़को पर छोड़ घर बार
लौट चले गावों को पैदल ही
अज्ञानता के वश हो गए लाचार
औरत बच्चे बूढ़े और नौजवान
निकले घरों से भर मन में गुब्बार
छुट गए कमाई के साधन
सुनी हो गयी गलियां सुने हुए बाज़ार
लगे जो दिन रात दूसरों की सेवा में
दे कर दुआ करें उनका मंगलाचार
बचे रहे बीमारी से सब मानस
सबके लिए करे प्रार्थना बारम्बार
स्वस्थ रहें सब बांटे खुशियाँ सबमें
भागे बीमारी आये नीलम को करार
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