221 2 122 2 21 2122
1.अब तुझ से यूँ बिछड़ने का क्यूँ मलाल आया
होकर जुदा भी मुझको तेरा खयाल आया
2. गर प्यार था निभाने में क्यों हुई यूँ मुश्किल
क्योंकर जेहन में फिर से हरदम सवाल आया
3महफिल में तो नहीं था कोई वजूद तेरा
जब शून्य में निहारा तेरा जलाल आया
4.मुश्किल हुआ यूँ मिलना सरहद पे अब है पहरे
मिलते हैं दिल से उत्तर भी बाकमल आया
सदियों से थी विरासत सॅंभली हुई हमारी
फैला हुआ प्रदूषण बनकर ये काल आया
6.कहते रहे खुदा का अवतार स्वयं को जो
उनका अहं भी टूटा जब इंतकाल आया
7.साहित्य से जो जुड़कर नीलम बने सयाने
जीना उन्हें भी जीवन तब बे मिसाल आया

*बहुत अच्छा प्रयास!*
ReplyDelete*आपकी साधना साहित्य बहुत अच्छी प्रगति कर रही है!*
स्नेह और सम्मान
के साथ
रेक्टर कथूरिया
बहुत बहुत आभार
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