निभाओगी कैसे
मोहब्बत है मुझसे ये बताओगी कैसे
मिलोगी जब मुझसे जताओगी कैसे
चेहरा तो छुपा लोगी मास्क से
आँखों की चमक छुपाओगी कैसे
इस तरह डरोगी जमाने से तो
फिर मोहब्बत को निभाओगी कैसे
जंग है ये तो अब लड़नी ही पड़ेगी
हार कर खुद को जिताओगी कैसे
परम्पराओं को बेड़ियाँ समझोगी तो
काटने का हौसला इन्हें लाओगी कैसे
चल पड़ी हो जो साथ मेरे बन हमदम
बीच राह में छोड़ मुझे जाओगी कैसे
यूँ हारकर छोड़ हौसला बैठ जाओगी तो
जमाने को अपनी दास्तान सुनाओगी कैसे
कुचल दोगी हसीन एहसास को यूँ ही तो
प्यार की इस क्यारी को खिलाओगी कैसे
कैसे करते है प्यार खुद को खुद से ही
नीलम ये ज़माने को दिखाओगी कैसे
बहुत खूब
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