Friday, 30 October 2020

बिन तेरे

 बिन तेरे 


तेरे बिन जो गुजरी कैसी ये रात आई है
बिन तेरे कैसी सावन की बरसात आई है

हर लम्हा जो गुजरता था साथ तेरे
आज कैसी ये कयामत की रात आई है

चेहरे से मुसकान उतर गई नकाब की तरह
पलकों के हिस्से आँसू की सौगात आई है

तेरे चेहरे को देखे बिन देखी दुनिया
आज कैसी ये मनहूस प्रभात आई है

नजरों से ना जुदा होते थे पल भर भी
उम्रभर जुदा रहने की बात आई है

ना कोई गिला ना शिकवा बस बेबसी
आज कैसी ये आखिरी मुलाकात आई है

चुपचाप नजरों में बसाना है हमेशा के लिए
आज विधाता की ये कैसी करामात आई है











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