खामोश सदाएँ
बारहा आती हुई खामोश सदाओं को
यूँ कभी सबके साथ जताया नहीं करते
सीखा है खुश रहना हर हाल जिन्दगी में
अपनी परेशानियां यूँ बताया नहीं करते
क्या हुआ गम है तन्हाई है पीड़ा है
रब की नेमत को ठुकराया नहीं करते
जी लो बसा कर मीठी यादों को दिल में
वक्त ने जो दिया है उसे गवाया नहीं करते
जब चल ही पड़े है अंजान राहों पर
राह की मुश्किलों से यूँ घबराया नहीं करते
राह पर मिलेंगे लोग तुम पर हँसने वाले
डर से पगडंडी को रास्ता बनाया नहीं करते
यकीन रख खुद की हाथों की लकीरों पर
मेहनत छोड़ किस्मत को आज़माया नहीं करते
कदर नहीं जिनको आपकी उनके लिए
अपने हुनर को दाँव पर लगाया नहीं करते
खोने को कुछ नहीं चंद बेड़ियों के सिवा
वक्त अपना यूँ दूसरों पर जाया नहीं करते
उठ चल आगे बढ़ मंजिल को पाने के लिए
दूसरों की बातों में नीलम यूँ आया नहीं करते
Very nice
ReplyDelete