Friday, 13 November 2020

दिवाली

 दिवाली 

मैं एक कुम्हार
चाक पर करता जाँ न्योछार
मेरे सपने सजते जाते
जैसे जैसे मिट्टी ले आकार
मेरे घर भी मने दिवाली
आए मिठाई और फलाहार
चाक पर जल्दी हाथ चलते
ख़ुशियों का ना कोई पार
बिक जाए सारा सामान
भर जाए मेरे भी भंडार
मन मे सपने सजाए
करते जाए सारे कार
नीलम की भी है यही हसरत
इसकी सुने सब परिवार
मत करना इसको रुसवा
कर रही यही प्रार्थना बारमबार
दीए जलाओ ख़ुशियाँ मनाओ
चारों ओर लाओ नई बहार
सबके घर मने दिवाली
मन से दिए बनाए कुम्हार 

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