Saturday, 12 September 2015

शिक्षिका

उठ ए  शिक्षिका 
कि तेरे करणधारों को तेरी ज़रूरत है । 
उठ  तेरे नौनिहालों  का भविष्य 
तेरे वर्तमान पर  निर्भर है । 
उठो , कि  तुम  उठा  सको सोए हुए  समाज को 
उठ  कि  उनको बता सको 
अपनी महान सभ्यता संस्कृति की बात 
उठो  कि  तुम्हारे उठने से देश उठेगा 
उठो कयोंकि तुम्हारे उठने से ही  रुकेगी 
भ्रूण हत्या ,दहेज हत्या, बलात्कार और शोषण  । 
साम्प्रदायकिता की धधकती आग को 
जलते हुए पंजाब ,गुजरात को 
बचा सकती हो सिर्फ तुम 
तुम  ही  सक्षम हो, तुम  ही आधार हो 
इस धरा की  इस  प्रकृति की । 
 तुम  ही रचना हो ,तुम  ही रचनाकार  हो 
तुम  ही वो  कुम्हार  हो जिसने रचना है 
देश के  युवा  को 
तुम ही  बचा सकती  हो 
उन्हें आंतकवादी बनने  से 
तुम ही  बना  सकती  हो उन्हें 
धैर्यवान ,ऊर्जावान  जागरूक  इंसान 
लिंगभेद न  हो ,न हो  जाति  धर्म  में  भेद । 
सब  हो इंसान सिर्फ  इंसान 
इंसानियत  ही हो  जिसकी पहचान 
इसलिए आज तुम्हें उठना ही होगा 
पाने के लिए  अपना खोया सम्मान 
आज धरती मांगती है तुमसे बलिदान 
भूल जाओ सब रिश्ते नाते 
भूल जाओ सब काम 
शिक्षा ही तुम्हारा धर्म है 
शिक्षा ही तुम्हारा मजहब है 
शिक्षा ही है तुम्हारे चारों धाम 
उठो पढाओ नैतिकता का पाठ 
सिखाओ करना माँ  का सम्मान 
भारत को बनाना  है महान 
संसार मे दिलानी है  अलग  पहचान  । 
इसलिए उठ ए  शिक्षिका 
कि तेरे करणधारों को तेरी ज़रूरत है । 
 उठ  तेरे नौनिहालों  का भविष्य 
तेरे वर्तमान पर  निर्भर है । 
उठ तुझे उठना ही होगा 
 उठ तुझे उठना ही होगा 
 

3 comments:

  1. सही कहा---आज के हालात में बस शिक्षक से ही ही उम्मीदें बची हैं--- शिक्षक और शिक्षिका को उठाना ही होगा तभी आ मिलेगी साथ में छात्र शक्ति की युवा आंधी और बदल डालेगी सब--क्रांति के लिए शिक्षिका का उठाना बहुत ज़रूरी है--

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